कैराना की लड़ाई हुई दिलचस्प, चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं भाई-बहन

शामली जिले के कैराना विधानसभा का चुनाव आरएलडी के मास्टरस्ट्रोक से दिलचस्प हो गया है। यहां चुनावी मैदान में भाई-बहन आमने-सामने खड़े हैं।

कैराना की लड़ाई हुई दिलचस्प, चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं भाई-बहन

शामली जिले के कैराना विधानसभा का चुनाव आरएलडी के मास्टरस्ट्रोक से दिलचस्प हो गया है। यहां चुनावी मैदान में भाई-बहन आमने-सामने खड़े हैं। बीजेपी ने सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह चुनावी मैदान में कैराना के चुनावी मैदान में उतारा है। तो मृगांका के चचेरे भाई अनिल चौहान इसी विधानसभा सीट से आरएलडी की टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल ने अनिल चौहान पर दांव लगाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

पूर्व सांसद का बेटा भी है मैदान में

कैराना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व सांसद मुन्नवर हसन के बेटे और सिटींग विधायक नाहिद हसन भी इसी क्षेत्र से मैदान में उतरे हुए हैं। जानकारों का मानना है कि हुकुम फैमिली के आमने-सामने होने का सबसे ज्यादा फायदा नाहिद को ही मिलेगा. वो मैदान भी मार सकते हैं।

 ये है बहन-भाई में टकराहट की असल वजह

मृंगाका बाहर से पढ़ी-लिखी हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर लोग उन्हें बहुत ज्यादा पहचानते नहीं हैं. फिलहाल मृगांका एक स्कूल चलाती हैं. उनकी पहचान सिर्फ उनके पिता हुकुम की वजह से है. उन्हें उनके चचेरे भाई अनिल चौहान की जगह टिकट मिला है. इस वजह से नाराज चौहान भाजपा छोड़कर अजित सिंह के राष्ट्रीय लोक दल में चले गए। चौहान साल 2014 में कैराना विधानसभा उप चुनाव में प्रत्याशी थे, लेकिन हार गए थे।

क्यों सुर्खियों में रहा है कैराना ? 

शास्त्रीय संगीत के मशहूर किराना घराने से जुड़ता है शामली जिले की कैराना विधानसभा का नाम. लेकिन,अब यहां संगीत की मिठास नहीं दिखती. इस मिठास की जगह सियासतदानों द्वारा घोले गए साम्प्रदायिक जहर ने ले ली है. ये विधानसभा क्षेत्र उस वक्त सुर्खियों में आ गया था, जब बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने कैराना से हिंदुओं के पलायन के आरोप लगाए थे. हालांकि बात बढ़ने पर हुकुम अपनी बात से पलट गए थे और मीडिया पर बात को तोड़-मरोड़कर पेश करने का अरोप लगाया था।