उपहार सिनेमा हादसा: गोपाल अंसल को 1 साल की सजा, सुशील को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में गोपाल अंसल को एक साल की सजा सुनाई है। गोपाल अंसल को एक महीने में सरेंडर करना होगा। हालांकि सुशील अंसल की उम्र को देखते हुए उनकी सजा माफ कर दी गई।

उपहार सिनेमा हादसा: गोपाल अंसल को 1 साल की सजा, सुशील को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में गोपाल अंसल को एक साल की सजा सुनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोर्ट ने उपहार सिनेमा हादसा मामले में पुनर्विचार याचिका पर गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। वहीं गोपाल अंसल को एक महीने में सरेंडर करना होगा। हालांकि सुशील अंसल की उम्र को देखते हुए उनकी सजा माफ कर दी गई।

कोर्ट को तय करना था कि क्या गोपाल अंसल और अंसल सुशील अंसल को सजा दी जाए या जुर्माना लेकर जेल की सजा माफ की जाए। 20 साल पुराने चर्चित उपहार सिनेमा अग्निकांड केस में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और पीड़ितों की पुनर्विचार याचिका पर पिछले साल सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिए थे।

वहीं सीबीआई ने अपनी पुनर्विचार याचिका में कहा कि कोर्ट में उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला है। इसलिए न्‍याय नहीं हुआ। इस आधार पर सीबीआई ने मांग की थी कि मामले पर दोबारा विचार किया जाए जबकि पीड़ि‍तों की तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जबकि देश के कानून के हिसाब से किसी भी अपराधी की सजा के साथ जुर्माना तो लगाया जा सकता है।

बता दें कि सुशील अंसल पांच महीने जबकि गोपाल अंसल चार महीने की सजा काट चुके हैं। इससे पहले दो जजों की बेंच ने अलग अलग फैसले सुनाए जिसकी वजह से मामले को तीन जजों की बेंच में भेजा गया था।

गौरतलब है कि नवंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया था। जब सुप्रीम कोर्ट ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में उन्हें तीन महीने के भीतर 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने उम्र के आधार पर कहा था कि जुर्माना ना देने पर 2 साल जेल की सजा दी जाएगी।

जानिए उपहार कांड में कब क्या-क्या हुआ

-13 जून 1997 को दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में बार्डर फिल्म के प्रसारण के दौरान आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी।

-22 जुलाई 1997 को पुलिस ने उपहार सिनेमा के मालिक सुशील अंसल और उसके बेटे प्रणव अंसल को मुंबई से गिरफ्तार किया था।

-24 जुलाई 1997 को दिल्ली पुलिस से मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।

-15 नवंबर 1997 को सीबीआई ने सुशील अंसल, गोपाल अंसल सहित 16 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी।

-27 फरवरी 2001 को अदालत ने सभी आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या, लापरवाही व अन्य मामलों के तहत आरोप तय किए थे।

-24 अप्रैल 2003 को हाईकोर्ट ने 18 करोड़ रुपये का मुआवजा पीड़ितों के परिवार वालों को दिए जाने का आदेश जारी किया था।

-20 नवंबर 2007 को अदालत ने सुशील व गोपाल अंसल सहित 12 आरोपियों को दोषी करार दिया। सभी को दो साल कैद की सजा सुनाई थी।

-4 जनवरी 2008 को हाईकोर्ट से अंसल बंधुओं और दो अन्य को जमानत मिली थी।

-11 सितंबर 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं की जमानत रद की और उन्हें तिहाड़ जेल भेजा था।

-19 दिसंबर 2008 को हाईकोर्ट ने अंसल बंधुओं की सजा को 2 साल से घटाकर एक साल कर दिया और 6 अन्य आरोपियों की सजा को बरकरार रखा था।

-30 जनवरी 2009 को उपहार कांड पीड़ितों के संगठन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट अंसल बंधुओं को नोटिस जारी किया था

-17 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं, उपहार कांड पीड़ितों और सीबीआइ की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था

-5 मार्च 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं की सजा को बरकरार था।