मैं अम्मा के सपनों को पूरा करूंगी: शशिकला

शशिकला ने विधायक दल की नेता चुने जाने के बाद कहा कि मैं अम्मा के सपनों को पूरा करूंगी और ये भरोसा दिलाती हूं कि सरकार गरीबों की भलाई के लिए काम करेगी।

मैं अम्मा के सपनों को पूरा करूंगी: शशिकला

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शशिकला ने कहा कि मैं अम्मा के सपनों को पूरा करूंगी और ये भरोसा दिलाती हूं कि सरकार गरीबों की भलाई के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब भी पार्टी मुश्किल वक्त से गुजरी और अम्मा को सीएम बने रहने में मुश्किलें आईं, हमारे प्यारे भाई पन्नीरसेल्वम ने ईमानदारी से जिम्मेदारी संभाली।

शशिकला नटराजन तमिलनाडु की सरकार की समान संभालेंगी। जयललिता के निधन के ठीक दो महीने बाद बीते रविवार को हुई एआईडीएमके विधायक दल की मीटिंग में उन्हें नेता चुना गया। इसके बाद मौजूदा सीएम पन्नीरसेल्वम ने अपना इस्तीफा गवर्नर को भेज दिया। शशिकला ने कभी वीडियो पार्लर चलाने से लेकर अब सीएम चुने जाने तक का सफर तय कर लिया है लेकिन उनके सामने कई चैलेंज आ सकते हैं। वे जयललिता जैसी लोकप्रिय नहीं हैं। उनके जैसा जन समर्थन नहीं है। इतना ही नहीं, उन पर जयललिता को जहर देने का आरोप भी लग चुका है।

जाने क्या है शशिकला के लिए  मुश्किल काम
1.शशिकला के लिए खास सिर्फ जया की करीबी
जया जैसा जनाधार और स्टेट्समैनशिप यानी सियासी गुर उनके पास नहीं है। गांवों और गरीबों में बेहद कम फेस वैल्यू है। चुनाव में कार्यकर्ताओं के साथ ट्यूनिंग बेहद मुश्किल होगी। शशिकला थेवर समुदाय से हैं, जो बड़ा वोट बैंक है। पन्नीरसेल्वम भी थेवर हैं। शशिकला को कम फायदा होगा।

2. चुनाव तक फूट को रोकना होगा
शशिकला पहले भी पावर सेंटर थीं। अभी विधायक चुनाव नहीं चाहते। उनके पास अभी जिताऊ चेहरा नहीं है। लेकिन साढ़े 3 साल बाद चुनाव हैं। थंबीदुरई, पन्नीरसेल्वम, वीएस चंद्रलेखा जैसे बड़े चेहरे विद्रोह कर सकते हैं। संभव है ये जया की रिश्तेदार दीपा के नेतृत्व में नया मोर्चा खोल दें।

3. 45 साल पुरानी पार्टी की तीसरी बड़ी नेता बन पाएंगी?
जया की मौत के 62 दिन बाद ही शशिकला सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गईं। जबकि जया को एमजीआर की मौत के 13 महीने बाद पार्टी का सबसे बड़ा पद मिला था। 1972 में एमजीआर ने डीएमके से अलग हो अन्नाद्रमुक बनाई थी। दाे ही नेता रहे। एमजीआर और जया। 45 साल बाद पार्टी में अब शशिकला तीसरा बड़ा चेहरा होंगी। लेकिन उन्हें एमजीआर और जया जैसे अपना राजनीतिक कद बढ़ाना होगा।

4. कभी लगा था जयललिता को जहर देने का आरोप
शशिकला दो दशक तक जयललिता की परछाईं की तरह रहीं। लेकिन 2011 में आरोप लगा कि शशिकला ने पति नटराजन को सीएम बनाने के लिए जयललिता को धीमा जहर देकर मारने की कोशिश की  इसके बाद जयललिता ने शशिकला को अपने घर और पार्टी से निकाल दिया। यह अलगाव 100 दिन चला। शशिकला के माफी मांगने पर जयललिता ने उन्हें दोबारा दोस्त के तौर पर अपना लिया। जब जयललिता का निधन हुआ तो शशिकला ने ही भतीजे दीपक के साथ अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। सीएम पन्नीरसेल्वम की बजाय शशिकला अम्मा के ज्यादा नजदीक नजर आईं।  वोटरों के बीच यही इमेज मजबूत करनी होगी।

5. डीएमके से सीधी लड़ाई, स्टालिन से मुकाबला और BJP से चुनौती
शशिकला को डीएमके के वर्किंग प्रेसिडेंट एमके स्टालिन से कड़ी टक्कर मिलेगी। स्टालिन का कहना है कि शशिकला लोगों की इच्छा के विरुद्ध सीएम बन रही हैं। जनता हो या जयललिता, शशिकला किसी की पसंद नहीं हैं। शशिकला के सामने चुनौती बीजेपी की तरफ से भी आ सकती है। पन्नीरसेल्वम के सीएम बनने तक बात ठीक थी, लेकिन शशिकला का सीएम बनना बीजेपी को परेशानी में डाल सकता है। जयललिता के निधन के बाद बीजेपी उम्मीद कर रही थी कि वे एआईएडीएमके को आसानी से अपने पाले में कर सकती है।