जब IAS अधिकारी ने शौचालय के गड्ढे से निकाला मल, पीएम भी हुए कायल

आईएएस अफसर पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्नवरन अय्यर ने तेलंगाना के एक गांव में जब खुद शौचालय के गड्ढे में उतरे और अपने हाथों से मल हटाया तो उनके साथ अन्य 40 नौकरशाह और गांववाले हैरान रह गए।

जब IAS अधिकारी ने शौचालय के गड्ढे से निकाला मल, पीएम भी हुए कायल

आईएएस अफसर पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्नवरन अय्यर ने तेलंगाना के एक गांव में जब खुद शौचालय के गड्ढे में उतरे और अपने हाथों से मल हटाया तो उनके साथ अन्य 40 नौकरशाह और गांववाले हैरान रह गए। बताया जा रहा है कि पीएम माेदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान का दरोमदार अय्यर के कंधों पर ही है। बीते रविवार को मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उनकी काफी प्रशंसा की थी। पीएम ने बताया कि किस तरह एेसे प्रयासों से समाज में परिवर्तन आ सकता है। पीएम ने ट्वीट कर कहा कि पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा शौचालय के गड्ढे को साफ करना काबिलेतारीफ था।

मीडिया रिपाेर्टस के मुताबिक 18 फरवरी को अय्यर 40 अन्य नौकरशाहों के साथ वारंगल जिले के गंगादेवीपल्ली पहुंचे थे। इन नौकरशाहों में 23 प्रिंसिपल सेक्रेटरी स्तर के अफसर भी थे। साथ ही कई राज्यों के ग्रामीण विकास विभाग के लोग और यूनीसेफ के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। यह टीम ट्विन पिट टॉयलेट टेक्नॉलजी की स्टडी करने पहुंची थी, जो मानव मल को कुछ ही समय में खाद में तब्दील कर देती है। इससे खुले में शौच करने की प्रथा को खत्म करने में मदद मिल सकती है।

यह सभी अफसर हैदराबाद के नैशनल इंस्टिट्यूट अॉफ रूरल डिवेलपमेंट (एनआईआरडी)में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में शरीक हुए हैं। इन लोगों ने यहां 7 घरों में शौचालयों को देखा और स्थानीय लोगों से बातचीत कर इस टेक्नॉलजी के काम करने के तरीके को समझाया। अय्यर ने गांव का दौरा करने के बाद ट्विट किया, खाली ट्विन पिट टॉयलेट को साफ करना पूरी तरह से सुरक्षित और साफ है। स्वच्छ भारत की टीम आज गंगादेवीपल्ली गांव पहुंची है।

अय्यर की तारीफ करते हुए जॉइंट कलेक्टर प्रशांत जीवन पाटिल ने बताया कि यह हम सबके लिए हैरानी भरा मौका था। उन्होंने हम सबके सामने उदाहरण रखा कि मानव मल साफ करना कोई नौकरों वाला काम नहीं है। उन्होंने बताया कि गंगादेवीपल्ली के लोग पिछले 16 वर्षों से ट्विन पिट टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2011 के जनगणना आंकड़े बताते हैं कि देशभर में 2.6 मिलियन सूखे शौचालय हैं। करीब 13,14,652 शौचालय एेसे हैं, जहां मानव मल खुली नालियों में फेंक दिया जाता है। एेसे 73 प्रतिशत शौचालय ग्रामीण और 27 प्रतिशत शहरी इलाकों में हैं।