भारत काे हथियार मिलना हाेगा आसान, अमेरिका ने बदला नियम

भारत को अपना 'मेजर डिफेंस पार्टनर' का आेहदा देते हुए अमेरिका ने एक्सपोर्ट कंट्रोल लॉ में कुछ अहम बदलाव किए हैं। इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का बिजनेस काफी आसान हो जाएगा।

भारत काे हथियार मिलना हाेगा आसान, अमेरिका ने बदला नियम

भारत को अपना 'मेजर डिफेंस पार्टनर' का आेहदा देते हुए अमेरिका ने एक्सपोर्ट कंट्रोल लॉ में कुछ अहम बदलाव किए हैं। इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का बिजनेस काफी आसान हो जाएगा। अमेरिका से हथियार और रक्षा तकनीक के लेन-देन में भारतीय कंपनियों को काफी आसानी होगी। हालांकि, ये मास डिस्ट्रक्शन रिलेटेड गुड्स नहीं होंगा।

मीडिया रिपाेर्ट के मुताबिक अमेरिका ने बड़े रक्षा साझेदार के भारत के दर्जे को मान्यता देते हुए निर्यात नियंत्रण कानूनों में अहम बदलाव किया है। इससे भारत को अमेरिकी से आधुनिक हथियार और तकनीक मिलना आसान होगा। यह भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचने का संकेत है। इन बदलावों के बाद अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा नियंत्रित सैन्य उत्पादों को आयात करने की इच्छुक भारतीय कंपनियों को आवेदन के साथ सैद्धांतिक मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि परमाणु सामग्री इस दायरे से बाहर होगी।

वहीं पर इस मामले काे लेकर सूत्रों का कहना है कि इसका साफ मतलब है कि सिर्फ दुर्लभ परिस्थितियों में ही भारत को हथियार बेचने का लाइसेंस मिलने से रोका जा सकता है। भारत अमेरिका कारोबारी परिषद (यूएसआईबीसी) के अध्यक्ष मुकेश अघी ने बीते मंगलवार को कहा कि भारत का शीर्ष रक्षा साझेदार का दर्जा हकीकत में बदलने से खुशी हो रही है। नए नियमों से उन कानूनों में भी बदलाव आएगा, जिससे मान्यताप्राप्त उपयोगकर्ता (वीईयू) बनने के बाद खरीदार कंपनियों को लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि भारत में काम कर रहीं भारतीय और अमेरिकी कंपनियां सैन्य और असैन्य दोनों ही मैन्युफैक्चरिंग के लिए वीईयू का दर्जा पा सकती हैं। इसके लिए हर कंपनी को अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। यूएसआईबीसी के रक्षा और एयरोस्पेस के निदेशक बेंजामिन श्वार्ट्ज ने कहा कि पिछले पांच सालों में 810 लाइसेंसों के तहत पांच अरब डॉलर का व्यापार हुआ है। नए नियमों के तहत, भारतीय कंपनियों को 25 फीसदी से कम हिस्सेदारी वाले उत्पादों को दोबारा निर्यात करने के लिए अमेरिकी कानूनों के तहत दोबारा मंजूरी नहीं लेनी होगी।

बढ़ता सैन्य सहयोग


  • 145 हल्की हॉवित्जर तोपों का सौदा हुआ है दोनों देशों में

  • 276 अरब रुपये में 11 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान खरीदे

  • 100 से ज्यादा लड़ाकू विमानों के सौदे की दौड़ में एफ-16 भी