कश्मीर मसला सुलझने से भी नहीं खत्म होगा सांप्रदायिक आतंकवाद: हक्कानी

पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा, 'कश्मीर की समस्या को हल करने के लिए पर भी सांप्रदायिक आतंकवाद कैसे खत्म होगा, क्योंकि सांप्रदायिक आतंकवाद का मतलब उन लोगों की हत्या करना है जो आपके धार्मिक संप्रदाय के नहीं हैं।'

कश्मीर मसला सुलझने से भी नहीं खत्म होगा सांप्रदायिक आतंकवाद: हक्कानी

पाकिस्तान की दशकों पुरानी कश्मीर नीति पर सवाल उठाते हुए देश के एक पूर्व शीर्ष दूत ने कहा कि इस मसले को सुलझाने से भी आतंकवाद, सांप्रदायिक संघर्ष की चुनौती खत्म नहीं होगी या तालिबान अफगानिस्तान में पुरानी इस्लामी व्यवस्था स्थापित करने के अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ेगा।

अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा कि कश्मीर की समस्या को हल करने के लिए पर भी सांप्रदायिक आतंकवाद कैसे खत्म होगा, क्योंकि सांप्रदायिक आतंकवाद का मतलब उन लोगों की हत्या करना है जो आपके धार्मिक संप्रदाय के नहीं हैं। कश्मीर की समस्या का समाधान करने से तालिबान नहीं रुकेगा, जिसका लक्ष्य अफगानिस्तान में पुरानी इस्लामी व्यवस्था को पैदा करना है।

हक्कानी ने आगे कहा, ‘इसलिए कभी-कभी पाकिस्तान की ओर से इसे एक अति राष्ट्रवादी दलील बना दिया जाना और कभी-कभी बहुत ही आसानी से यह कह देना कि अमेरिका में पाकिस्तान के रुख को लेकर हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम चाहते हैं कि दोनों पक्ष सही मायने में अपने रुख के बारे में सोचें।

हक्कानी ने करीब एक दर्जन शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक द्वारा जारी एक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान यह बात कही। इस रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन से अपील की गई है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए।

‘ए न्यू यूएस अप्रोच टू पाकिस्तान: एनफोर्सिंग एड कंडिशंस विदाउट टाइज’ नामक इस रिपोर्ट को ‘द हेरीटेज फाउंडेशन’ के लिस कर्टिस और ‘हडसन इंस्टीट्यूट’ के हक्कानी ने लिखा है। इसमें पाकिस्तान को ‘आतंकवाद को प्रायोजक देश’ घोषित करने की सिफारिश के अलावा बाकी सब कुछ कहा गया है।

इसमें पाकिस्तान की ओर तेज, स्पष्ट अमेरिकी दृष्टिकोण अपनाने की बात की गई है। हक्कानी ने इस्लामाबाद द्वारा उसके पड़ोसियों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन दिए जाने की बात की और कहा, ‘पाकिस्तान को इस बारे में थोड़ा आत्मविश्लेषण करने की आवश्यकता है कि क्या हम इसे हमेशा जारी रख सकते हैं और क्या ऐसा करके हमारी विश्वसनीयता बनी रह सकती है?