नोटबंदी के बाद व्यापारियों को सस्ते कर्ज दें बैंक: रिजर्व बैंक

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने शनिवार को कहा कि बैंकों को पिछड़ रहे क्षेत्रों में ऋण की मांग को प्रोत्साहन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए।

नोटबंदी के बाद व्यापारियों को सस्ते कर्ज दें बैंक: रिजर्व बैंक

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने शनिवार को कहा कि बैंकों को पिछड़ रहे क्षेत्रों में ऋण की मांग को प्रोत्साहन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकों को कम लागत की जमा राशियों की बाढ़ और आरबीआई द्वारा पहले की गई नीतिगत ब्याज दर में कटौतियों का फायदा हुआ है।

औसत कटौती काफी कम : पटेल ने कहा कि हमने पूर्व में रेपो दर में जो कटौती की है और साथ ही बैंकों के पास जो नकदी जमा की बाढ़ आई है जो कि चालू खाते और बचत खाते की जमा है, उसका उन्हें फायदा हुआ है। इसके मद्देनजर बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने बैंकों के कर्ज की दर में कटौती की गुंजाइश पर जोर देते हुए कहा कि ऋणों पर ब्याज दर में औसत कटौती काफी कम रही है। ऐसे में हमें लगता है कि ब्याज दरों में और कटौती की कुछ गुंजाइश है। यदि आप आवास, व्यक्तिगत जैसे क्षेत्र देखें तो अन्य क्षेत्रों के लिए बैंकों द्वारा ब्याज में अपेक्षाकृत अधिक कटौती की गई है।

रेपो दर यथावत : पटेल ने उम्मीद जताई कि कुछ ऐसे क्षेत्रों में ब्याज दरों में और कटौती की जाएगी, जहां अभी तक कटौती काफी कम रही है। याद रहे कि इसी सप्ताह आरबीआई ने मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को 6.25 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर को 5.57 प्रतिशत पर कायम रखा था। इससे पहले जनवरी, 2015 से सितंबर, 2016 तक केंद्रीय बैंक ने रेपो दरों में 1.75 प्रतिशत तक की कटौती की थी।

खुदरा मुद्रास्फीति में बदलाव नहीं : पटेल ने कहा जहां तक खुदरा मुद्रास्फीति को लेकर लक्ष्य का सवाल है, हमारे उद्देश्य में कोई बदलाव नहीं आया है। मौद्रिक नीति समिति ने 2021 तक खुदरा मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर कायम रखा है।

बजट 2017-18 में सरकार ने चुनावी बांड को जारी करने के लिए रिजर्व बैंक कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया है। सरकार चुनावी बांड के खरीदारों की गोपनीयता सुनिश्चित करने को जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन करेगी।यार कर लिया गया है।