लंग्स-ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज़

एम्स की ओर से संचालित दिल्ली कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरुषों में लंग्स कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक देखने को मिल रहे हैं।

लंग्स-ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज़

कैंसर के न सिर्फ मामले बढ़ रहे हैं, बल्कि इससे मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। कैंसर के डायग्नोस से लेकर इलाज की सुविधाएं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद कैंसर रुक नहीं पा रहा है। दिल्ली में पुरुषों में लंग्स कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक देखने को मिल रहे हैं। यह खुलासा एम्स की ओर से संचालित दिल्ली कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्ट में किया गया है।

कैंसर शरीर के किसी भी अंग में अलग-अलग रूपों में फैल सकता है। कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसके कारण पूरे विश्व में मौत का ग्रास बनने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाया जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर के सभी अस्पताल और सेंटर्स शामिल हैं, जहां कैंसर का इलाज होता है। प्रत्येक मरीज की रिपोर्ट और उसके इलाज को इस डेटा में शामिल किया गया है।

रिपोर्ट में पहले लंग्स कैंसर हर 1 लाख में औसतन 16.7 लोगों को होता था। अब यह बढ़कर 17.2 हो गया है। इसी तरह से प्रोस्टेट कैंसर के मामले भी बढ़े हैं। मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन जीभ के कैंसर के मामले में थोड़ी कमी आई है। इसी तरह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर 39.1 से बढ़कर 41 तक पहुंच गया है। एम्स के ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व डॉक्टर पीके जुल्का ने बताया कि महिलाओं में गॉल ब्लैडर और ओवरी कैंसर में कमी आई है। सोटने वाली बात यह है कि लाइफस्टाइल की वजह से ब्रेस्ट कैंसर के केस काफी बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं में मौत की दर 11.4 से बढ़कर 12.5 हो गई है, वहीं पुरुषों में 14.2 से बढ़ कर 16.2 हो गई है। कैंसर की वजह से पुरुषों में पिछली रिपोर्ट की तुलना में एक लाख पर दो मौतें ज्यादा दर्ज की गई हैं। मौत की दर में यह बड़ा अंतर है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में कैंसर की वजह से मरने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या ज्यादा है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. हरित चतुर्वेदी का कहना है कि इस साल ‘वर्ल्ड कैंसर डे’ की थीम ‘वी कैन, आई कैन’ है, जिसका मतलब है कि हम सब मिलकर इस जानलेवा बीमारी से लड़ें और जीत हासिल करें। डॉक्टर ने कहा कि अधिकतर कैंसर के मामले और मौतें विश्व के कम विकसित क्षेत्रों में होती हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद कैंसर के मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। अगर इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो 2030 तक यह और भी खतरनाक स्तर तक पहुंच जाएगा।