अगर राष्ट्रगान फिल्म का हिस्सा तो खड़ा होना जरूरी नहीं: SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सिनेमा, न्यूजरील या डाक्यूमेंटरी में राष्ट्रगान का इस्तेमाल किया गया है तो लोगों को खड़े होने की जरूरत नहीं है।

अगर राष्ट्रगान फिल्म का हिस्सा तो खड़ा होना जरूरी नहीं: SC

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश पर रोक लगाने और उसे वापस लेने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी सिनेमा, न्यूजरील या डाक्यूमेंटरी में राष्ट्रगान का इस्तेमाल किया गया है तो लोगों को खड़े होने की जरूरत नहीं है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन किया। मामले में कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि ये सवाल देश के नागरिकों की देशभक्ति की भावना दिखाने का है। जब इसे लेकर कोई कानून नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश अहम हो जाता है। राष्ट्रगान को सिनेमाघरों के अलावा सभी स्कूलों में जरूरी किया जाए क्योंकि देशभक्ति की भावना की शुरुआत बच्चों से की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को लेकर दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि इस आदेश को वापस लें क्योंकि ये आदेश अधिकारों का हनन करते हैं। कोर्ट को सिनेमा जैसे इंटरटेनमेंट जगहों पर ये लागू नहीं करना चाहिए।

इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रगान को लेकर अहम् सुनवाई हुई। पिछले 30 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगान, यानी 'जन गण मन' से जुड़े एक अहम अंतरिम आदेश में कहा था कि देशभर के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि राष्ट्रगान बजते समय सिनेमाहॉल के पर्दे पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाया जाना भी अनिवार्य होगा और सिनेमाघर में मौजूद सभी लोगों को राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रगान राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक देशभक्ति से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, ध्यान रखा जाए कि किसी भी व्यावसायिक हित में राष्ट्रगान का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके अलावा किसी भी तरह की गतिविधि में ड्रामा क्रिएट करने के लिए भी राष्ट्रगान का इस्तेमाल नहीं होगा और राष्ट्रगान को वैरायटी सॉन्ग के तौर पर भी नहीं गाया जाएगा।