निजी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़

डिस्पोजबल्स को बार-बार इस्तेमाल कर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं निजी अस्पताल...

निजी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़

आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि कई प्राइवेट अस्पतालों में इन सामग्रियों का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि एक बार उपयोग में लाकर इनका निपटान करना जरूरी होता है। ये अस्पताल उपयोग में लाए जा चुके इन सामानों की कीमत पता नहीं कितनी बार वसूलते रहते हैं। लेकिन, बड़ी चिंता की बात यह है कि इससे इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इंडस्ट्री सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे से अस्पतालों को हरेक इलाज में 20,000 से 30,000 रुपये का ज्यादा फायदा होता है।

यह बेहद अनैतिक काम इतने धड़ल्ले से हो रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ऑफिस मेमोरैंडम जारी कर सर्जरी के दौरान उपयोग में आने वाले डिस्पोजबल आइटमों के दोबारा इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी खासकर कार्डिऑलजी (हृदयरोग की चिकित्सा) को लेकर जारी की गयी है जिसमें ज्यादातर सामग्रियां एक बार उपयोग में लाए जाने योग्य होती हैं।

21 दिसंबर, 2016 को जारी इस मेमोरैंडम में कहा गया है, 'एक प्रसीजर के बाद ये सामग्रियां स्टेरिलाइज्ड कर दुबारा इस्तेमाल में लायी जाती हैं और (मरीजों) से इनके पूरे-पूरे पैसे वसूले जाते हैं।' इसमें कहा गया है कि 'मंत्रालय इस मुद्दे को गंभीरता से देख-परख रहा है'। आगे स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत पैनल में शामिल स्वास्थ्य संगठनों में डिस्पोजबल आइटम्स का दुबारा इस्तेमाल की अनुमति नहीं है, खासकर कार्डिऑलजी और दूसरे विशेष इलाजों में। इसमें हालांकि यह साफ नहीं किया गया है कि ऐसे निजी अस्पताल जो कि CGHS की परिधि में नहीं आते, खासकर बड़े प्राइवेट अस्पतालों की श्रृंखलाओं के खिलाफ ऐसे मामलों में किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।