अब स्कूली बच्चों को मिलेगी भारी बस्ते से निजात

स्कूल में बच्चों के लिए भारी बस्ता ले जाना अब बहुत जल्द गुजरे जमाने की बात हो सकती है। जल्द ही बच्चों को भारी बस्ते से निजात मिल सकती है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय अब छात्रों के स्कूली बैगों का बोझ कम करने के इरादे से सीबीएसई स्कूलों के लिए नया मानदंड तैयार करने पर काम कर रहा है....

अब स्कूली बच्चों को मिलेगी भारी बस्ते से निजात

स्कूल में बच्चों के लिए भारी बस्ता ले जाना अब बहुत जल्द गुजरे जमाने की बात हो सकती है। जल्द ही बच्चों को भारी बस्ते से निजात मिल सकती है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय अब छात्रों के स्कूली बैगों का बोझ कम करने के इरादे से सीबीएसई स्कूलों के लिए नया मानदंड तैयार करने पर काम कर रहा है। सीएसई द्वारा आयोजित एक समारोह में उन्होंने कहा कि मैं स्कूली बस्तों का बोझ कम करने जा रहा हूं। भारी बस्ता ढोना जरूरी नहीं है, यह निश्चित रूप से होगा। हम सीबीएसई स्कूलों के लिए नियमों की तैयारी कर रहे हैं, ताकि अनावश्यक रूप से किताब-कॉपी नहीं ले जाना पड़े।

बता दें कि इस समारोह में कई स्कूलों के बच्चे शामिल थे। एचआडी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सीबीएसई ने अपने स्कूलों से दूसरी कक्षा तक के छात्रों को स्कूल बस्ता लेकर नहीं आने और आठवीं कक्षा तक सीमित तादाद में किताबें लेकर आने का निर्देश दिया है। साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय इन मानदंडों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इन पहलुओं पर काम कर रही है।

गौरतलब है कि जावडेकर का कहना है कि स्कूली बच्चों को दिए जाने वाले प्रॉजेक्ट वर्क्स में भी बदलाव की वह योजना बना रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया किया है कि होता यह है आमतौर पर पैरंट्स ही अपने बच्चों को दिए गए प्रॉजेक्ट वर्क्स को पूरा करते हैं। अपने परिवार की एक घटना का जिक्र करते हुए जावडेकर ने कहा कि एक बार मैंने देखा कि मेरी पोती अपनी मां की मदद से घर में होमवर्क कर रही है। जब उससे पूछा कि क्या हो रहा है तो उसने बताया कि बड़ों की मदद के बिना टीचर्स बच्चों के असाइनमेंट पर ‘स्टार’ नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि वास्तव में एजुकेशन वहां मिलती है, जहां पर बच्चे गलती करते हैं और सीखते हैं। बड़े लोग मदद कर सकते हैं, माता-पिता को भी शिक्षित होने की जरुरत है।