सीरिया में 13,000 विराेधियाें काे दी गई फांसी

सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल असद के सरकार ने 13,000 विरोधियों को जेल में रहस्यमय तरीके से फांसी लगा दी गयी। उन सभी कैदियाें काे उस गजह पर फांसी लगाया गया जहां हर हफ्ते 50 लोगों को सामूहिक तौर पर मौत की सजा दी जाती है

सीरिया में 13,000 विराेधियाें काे दी गई फांसी

सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल असद के सरकार ने 13,000 विरोधियों को जेल में रहस्यमय तरीके से फांसी लगा दी गयी।  उन सभी कैदियाें काे उस गजह पर फांसी लगाया गया जहां हर हफ्ते 50 लोगों को सामूहिक तौर पर मौत की सजा दी जाती है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही खबराें के मुताबिक बीते मंगलवार को एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया जो काफी हैरान कर देने वाला है। इन कैदियों को पहले 10 से 15 मिनट तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाता है फिर डाक्टरों और अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें तड़पता हुआ उतारकर सभी की गर्दन तोड़ दी जाती है।

एमनेस्टी की 'ह्यूमन स्लॉटरहाउस मास हैंगिंग एंड एक्सटरमिनेशन एट सैदनाया प्रीजन' शीर्षक वाली रिपोर्ट सुरक्षाकर्मियों, बंदियों और न्यायाधीशों सहित 84 प्रत्यक्षदर्शियों के साक्षात्कारों पर आधारित है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011 से वर्ष 2015 के बीच सप्ताह में कम से कम एक बार करीब 50 लोगों के समूहों को मनमाने ढंग से मुकदमे की कार्यवाही करने, पीटने और फिर फांसी देने के लिए 'आधी रात को पूरी गोपनीयता के बीच' कारागार से बाहर निकाला जाता था।

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले समूह ने लिखा, 'इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी आंखों पर पट्टी बंधी रहती थी। उन्हें उनकी गर्दनों में फंदा डाले जाने तक यह भी नहीं पता होता था कि वह कैसे और कब मरने वाले हैं। पीड़ितों में अधिकतर आम नागरिक थे, जिनके बारे में ऐसा माना जाता था कि वे राष्ट्रपति बशर-अल-असद की सरकार के विरोधी थे।

फांसी के गवाह रहे एक पूर्व न्यायाधीश ने कहा, 'वे उन्हें 10 से 15 मिनट तक फांसी पर लटकाए रखते थे। एमनेस्टी ने इसे युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। एमनेस्टी ने सीरिया सरकार पर बंदियों का बार-बार उत्पीड़न करके और उन्हें भोजन, पानी एवं चिकित्सकीय देखभाल से वंचित रखके 'तबाही की नीति' अपनाने का आरोप लगाया। समूह ने पहले कहा था कि मार्च 2011 से देश में उत्पन्न हुए संघर्ष के बाद से करीब 17,700 लोग सीरिया में सरकार की हिरासत में मारे गए।