आतंकवाद की फंडिंग पर घिरा PAK

अंतरराष्ट्रीय संस्था द फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को एक नोटिस के जरिए यह साबित करने के लिए तीन महीने का समय दिया है कि उसने जमात-उत-दावा और जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने वालों के रास्तों को रोकने का क्या काम किया है।

आतंकवाद की फंडिंग पर घिरा PAK

आंतकवादियों काे शरण देने के रूप में जाने जाने वाले पाकिस्तान की अब अंतरराष्ट्रीय जगत में काफी फजीहत हो रही है। आतंकवाद के वित्त पाेषण पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था द फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स  एफएटीएफ ने पाकिस्तान को एक नोटिस के जरिए यह साबित करने के लिए तीन महीने का समय दिया है कि उसने जमात-उत-दावा और जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने वालों के रास्तों को रोकने का क्या काम किया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार फ्रांस की राजधानी पैरिस में पिछले सप्ताह एफएटीएफ का अधिवेशन हुआ था। इस अधिवेशन में पाकिस्तान को 90 दिन का समय मांगने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा। जनवरी के आखिरी हफ्ते में जमात-उत-दावा और जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ की गई कार्रवाई का हवाला देते हुए पाकिस्तान ने यह जताने की कोशिश की कि वह वाकई कार्रवाई को लेकर गंभीर है। इस कार्रवाई का ही नतीजा है कि जमात-उत-दावा के आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद पर उसके घर में कैद किया गया है और उसके यात्रा करने पर भी रोक लगाई गई है।

रिपाेर्ट के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि एशिया पेसिफिक ग्रुप की रिपोर्ट जनवरी तक तैयार कर ली गई थी जो पाकिस्तान के दावों को सीधे तौर पर खारिज कर रही थी। रिपोर्ट में पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे कई सवाल थे जिनका जवाब मिलना जरूरी था। हालांकि पाकिस्तान ने कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की, पर डाेनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान को एफएटीएफ के सवालों का जवाब देकर उसे संतुष्ट करना ही होगा।

बहरहाल जनवरी में इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पाकिस्तान में जो कार्रवाई हुई, उसी की बदौलत पाकिस्तान के केस को अगले तीन महीनों के लिए टाला गया। इसके साथ ही पाकिस्तान को एक और मौका दिया गया है कि वह अपने दावों को सही साबित करे।

खास तौर पर जमात-उद-दावा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि में आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि ऐसे लोग जो इस तरह के कामों में शामिल रहे हैं जो वैसे तो आतंकवादी नहीं है, पर वह हमारे समाज के लिए हानिकारिक हो सकता है, ऐसे लोगों पर हमने कड़ी कार्रवाई की है। हमारी मंशा ऐसे लोगों पर नजर रखने की है।