...तो इस तरीके से जीतना चाहते हैं लक्ष्मीकांत वाजपेयी

आखिर पश्चिमी यूपी में बीजेपी का प्लान क्या है? वो रूठे जाटों को कैसे मना रही है। ऐसे तमाम सवालों का जबाव लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने नारदा न्यूज को दिया है।

...तो इस तरीके से जीतना चाहते हैं लक्ष्मीकांत वाजपेयी

पश्चिमी यूपी में बीजेपी के बिग फेस और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी मेरठ शहर से विरोधी दलों को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। इस सीट से हैट्रिक लगाने की लक्ष्मीकांत वाजपेयी की क्या चुनावी तैयारी है ,जानने के लिए नारदा न्यूज के पॉलिटिकल एडिटर विकास राज तिवारी ने ने उनसे खास बातचीत की है। पेश है मुख्य अंश-

ऐसी खबरें है कि पश्चिमी यूपी में जाट समाज बीजेपी से नाराज है और इसका नुकसान पार्टी को चुनावों में मिल सकता है।

कुछ लोगों की नाराजगी की खबरें जरुर आई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि जाट समाज बीजेपी से नाराज है। हम चुनाव में पीएम मोदी के नाम पर और बीजेपी के काम पर जा रहे हैं। और हर तबके और हर समाज के लोगों का समर्थन हमें मिल रहा है।

क्या कारण है कि बीजेपी को चुनाव आते ही राम की याद आ जाती है ? और हर बार अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वादा किया जाता है।



देखिए, राम हमारी आस्था का विषय है, चुनाव का मुददा नहीं। राम पर आस्था रखने वाले लोग सभी दलों में हैं। राम हमारी कोई व्यक्तिगत बपौती नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में मामला है और हम हाईकोर्ट से जीते हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना संविधान की मर्यादा के हिसाब से हमारी मजबूरी है। इस बार भी हमने अपने घोषमापत्र मं राम मंदिर बनाने की बात कहीं है।

क्या पश्चिमी यूपी का चुनाव ध्रुवीकरण की राजनीति पर नहीं लड़ा जा रहा है?

देखिए, बीजेपी चुनाव में किसी भी तरह से ध्रुवीकरण नहीं होने देगी। हम हर हालत में सबका साथ और सबका विकास सुनिश्चित करेंगे। साथ ही प्रदेश सरकार की विफलता और केंद्र सरकार की सफलता को जनता के सामने लाएंगे। ध्रुवीकरण की कोशिश वही लोग करने की कोशिश करेंगे जिन्हें मतदान से पहले निराशा हाथ लग रही है।

आप अपने क्षेत्र में किन मुददों पर चुनाव लड़ रहे हैं?

अतिक्रमण और जाम, जलभराव और जलनिकासी और इनसे भी पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना कराना है। साथ ही साथ मेरठ में छोटे हवाई जहाज उतरने की व्यवस्था कराना है। साथ ही मेरठ की स्पोटर्स, हैंडलूम, बाजा और कैंची इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की मदद लेंगे।

सपा का आरोप है कि बीजेपी ने उनका घोषणा पत्र कॉपी किया है?

मैं इस बात को मानने को तैयार नहीं हूं। सपा को तो घोषणा पत्र जारी करने का हक ही नहीं है क्योंकि उसने पहले किए गए वादे ही नहीं पूरे किए हैं। उनके आधे—अधूरे लोकार्पण की बात करें तो मेट्रो रेल में आधा पैसा केंद्र सरकार का है। इसी तरह समाजवादी एंबुलेंस में आधा पैसा केंद्र सरकार का है।

अखिलेश और राहुल के साथ आने से क्या मुकाबला कड़ा हो गया है?

कांग्रेस 27 साल यूपी बेहाल के नारे के साथ चली थी। जिस शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया वह पहली बस यात्रा में ही बीमार हो गईं थीं। मैं जानना चाहता हूं कि आखिर कांग्रेस के सामने ऐसी कौन सी मजबूरी आ गई कि सरकार बनाने का सपना पीछे छोड़ एक क्षेत्रीय दल के सामने त्राहिमाम हो गई। इसलिए चुनाव परिणाम में उनके विधायकों की संख्या दहाई तक पहुंचना मुश्किल है।

चुनावी चेहरा न होने से क्या भाजपा प्रत्याशियों को क्या कठिनाई महसूस हो रही है?

उनके पास एक ही चेहरा है। जिसके साथ उनके बेटे ने दगा किया है। कांग्रेस ने अपना चेहरा दिल्ली वापस कर दिया। बहुजन समाज पार्टी का बहुमत नहीं रहा। वहीं हमारे पास  हजारों चेहरे हैं जिसे राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा और जिसे विधायक दल अपना नेता बनाएगा वो मुख्यमंत्री होगा।

क्या तमाम दलों की तरह भाजपा भी बगावत से नहीं जूझ रही है?

कार्यकर्ताओं की नाराजगी स्वाभाविक प्रक्रिया है। कुछ लोगों के मन में धारणा होती है कि वह अपने क्षेत्र के उपयुक्त उम्मीदवार हैं और हो सकता है कि वो हों भी लेकिन जब आलाकमान तय करता है तो उसके कुछ कंपल्संस होते हैं। लेकिन यदि कहीं कोई कठिनाई होगी तो उसका हल निकाल लिया जाएगा।

लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी का अंजाम आप बिहार चुनाव में देख चुके हैं?

दूध का जला छाछ फूंककर पीता है, इसलिए बिहार और दिल्ली में जो कुछ हुआ, उत्तर प्रदेश में उसे सुधारा जा चुका है।

किस नारे के सहारे यूपी में सत्ता की जंग जीतेंगे?

हम सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ आगे बढ़ेंगे। हम लोगों को बताएंगे कि यूपी की सरकार केंद्र सरकार की अच्छी योजनाओं को लागू नहीं कर रही है। जब सूबे में बीजेपी की सरकार आ जाएगी तो इन सभी योजनाओं का जनता तक लाभ पहुंचेगा और सच मायने में उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश होगा।

तमाम सर्वे के आंकड़ों में भले ही भाजपा आगे चल रही हो लेकिन बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है।



लोकसभा चुनाव में भी ऐसे ही आंकड़े दिखाए जा रहे थे, नतीजा सबके सामने है। अंडर करंट है, भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

अगर चुनाव परिणाम आने के बाद किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो वैसे हालात में क्या बीजेपी मायावती का समर्थन कर सकती है ?

देखिए ये एक काल्पनिक सवाल है। अभी बीजेपी जीतने के लिए लड़ रही है और यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। बाकी आगे क्या होगा कोई नहीं जानता  ? फैसले हालातों के हिसाब से लिए जाते हैं।