2019 तक 50 हजार पंचायतें गरीबी से मुक्त होंगी

केंद्र सरकार ने साल 2019 तक 50 हजार पंचायतों को गरीबी से मुक्त करने का फैसला किया है।

2019 तक 50 हजार पंचायतें गरीबी से मुक्त होंगी

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बजट पेश करते हुए कहा कि साल 2019 तक 50 हजार पंचायतें गरीबी से मुक्त होंगी। बता दें कि देश में फिलहाल 29.8 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। 60 प्रतिशत गरीब बिहार, झारखंड, आेडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश आैर उत्तराखंड राज्यों में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर क्षेत्र या तो बाढ़ प्रभावति या फिर सूखे जैसी स्थितियों से जूझ रहे हैं। ज्ञात हो कि जिन लोगों की दैनिक आय शहरों में 28.65 रुपये और गांवों में 22.24 रुपये से कम है वे गरीबी रेखा के नीचे आते है।

इंदिरा गांधी आवास योजना

कांग्रेस के नेतृत्व वाली राजीव गांधी सरकार द्वारा गरीब लोगों को मकान दिलाने के उद्देश्य से इस आवास योजना का आरंभ किया गया था। योजना का वित्तपोषण केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में किया जाता था। उत्तर-पूर्व के राज्यों के लिए केंद्र-राज्य वित्त अनुपात 90:10 था। संघ शासित प्रदेशों के लिए योजना 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित है। 1985-86 से प्रारंभ योजना का पुनर्गठन 1999-2000 में किया गया था जिसके अंतर्गत गांवों में गरीबों के लिए मुफ़्त में मकानों का निर्माण किया जाता था। मोदी सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) कर दिया है।

प्रधानमंत्री आवास याेजना

प्रधानमंत्री आवास याेजना के अनुसार ‘साल 2022 तक सभी के लिए मकान’ के उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में पुनर्गठित करने को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत 2016-17 से लेकर 2018-19 तक तीन सालों में एक करोड़ मकान बनाने की योजना तैयार की गई है।

मनरेगा

मनरेगा भारत में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है, जिसे 25 अगस्त 2005 को विधान द्वारा अधिनियमित किया गया था। यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है जो हर दिन 220 रुपये की सांविधिक न्यूनतम मजदूरी पर सार्वजनिक कार्य-सम्बंधित अकुशल मजदूरी करने के लिए तैयार हैं। 2010-11 वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए केंद्र सरकार का परिव्यय 40,100 करोड़ रुपए था। नए बजट में 48 हजार करोड़ रूपए में इस योजना के लिए प्रस्ताव का एलान किया गया है।