‘गैर जरूरी’ सीजेरियन डिलीवरी पर लगेगी लगाम !

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से ‘गैर जरूरी’ सीजेरियन सर्जरी पर लगाम लगाने को कहा है...

‘गैर जरूरी’ सीजेरियन डिलीवरी पर लगेगी लगाम !

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों से ‘गैर जरूरी’ सीजेरियन सर्जरी पर लगाम लगाने का आदेश दिया गया है. यह कदम एक हेल्थ सर्वे के चलते उठाया गया है जिसमें सामने आया था कि प्राइवेट सेक्टर में इस किस्म की सर्जरी में तेजी से वृद्धि हुई है.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे ‘एनएफएचएस-4’ के मुताबिक वर्ष 2005-06 में देशभर में हुए कुल डिलीवरी में से 8.5 फीसदी मामलों में सीजेरियन डिलीवरी की गई जबकि वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा बढ़कर 17.2 फीसदी हो गया.

वहीं प्राइवेट सेक्टर में वर्ष 2005-06 में 27.7 फीसदी डिलीवरी सी-सेक्शन से हुए, वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा बढ़कर 40.9 फीसदी हो गया.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय राज्य सरकारों और गायनोक्लॉजिस्ट ऑर्गनाइजेशन को पत्र लिख उन्हें सुझाव दे रहा है कि प्राइवेट सेक्टर में जहां सीजेरियन की दरें बहुत ज्यादा  हैं उन पर दबाव बनाने के लिए वे क्लिनिकल इस्टेबलिशमेंट ‘रजिस्ट्रेशन ऐंड रेगुलेशन’एक्ट और अन्य कानूनों का इस्तेमाल करें.

साथ ही मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सीके मिश्रा ने कहा कि हम राज्यों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वह प्राइवेट सेक्टर को इस बात के लिए राजी करे कि सीजेरियन जरूरत होने पर ही किया जाए.

बता दें, हाल ही में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा को पत्र लिख सुझाव दिया था कि जो चिकित्सक बगैर किसी उचित चिकित्सीय कारण के सीजेरियन ऑपरेशन करते हैं उनका नाम सार्वजनिक कर उन्हें शर्मिंदा किया जाना चाहिए.