BJP को यूपी-उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत, कांग्रेस ने छीना पंजाब

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव नतीजों ने बीजेपी को केसरिया होली खेलने का मौका दे दिया है। राम मंदिर से भी प्रचंड मोदी लहर पर सवार बीजेपी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अभी तक सबसे बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही है।

BJP को यूपी-उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत, कांग्रेस ने छीना पंजाब

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव नतीजों ने बीजेपी को केसरिया होली खेलने का मौका दे दिया है। राम मंदिर से भी प्रचंड मोदी लहर पर सवार बीजेपी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अभी तक सबसे बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही है। पांच राज्यों के चुनावों के लिए शनिवार को हुई मतगणना के नतीजों और रुझानों में बीजेपी 403 सीटों वाले यूपी में 300 के पार, जबकि 70 सीटों वाले उत्तराखंड में 50 से भी ज्यादा सीटें जीतती दिख रही है। दोनों राज्यों में बीजेपी का यह अब तक का सबसे बड़ा स्कोर होगा। हालांकि पंजाब में बीजेपी को झटका लगा है। आम आदमी पार्टी के अरमानों को रौंदते हुए कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी-अकाली सरकार को सत्ता से बेदखल करने की ओर बढ़ रही है। गोवा और मणिपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा है।

यूपी में राम लहर पर भारी मोदी

आम चुनाव 2014 की तरह ही बीजेपी ने यूपी में बाकी पार्टियों का गेम ओवर कर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे के सहारे चुनाव लड़ रही बीजेपी की यूपी में ऐसी सुनामी चली कि ने कांग्रेस-अखिलेश का साथ काम आए, न मायावती का हाथी ही टिक पाया। यह लहर यूपी में 1991 में बीजेपी की सरकार बनते वक्त छाई राम लहर से भी तेज रही। मंदिर आंदोलन के वक्त जनता के चरम समर्थन के सहारे यूपी में सरकार बनाने वाली बीजेपी को उस वक्त 221 सीटें मिली थीं। उस वक्त कांग्रेस को महज 46 सीटें ही मिली थीं। बीजेपी को 31.76% वोट मिले थे। 1991 के चुनाव कुल 419 सीटों पर हुए थे।

उत्तराखंड में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत

मोदी की इस लहर का असर पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी दिखा और कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ हो गया। हरीश रावत सरकार में काबीना मंत्री रहे नेता तो चुनाव हारे ही खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत भी हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा सीट से चुनाव हार गए। खबर लिखे जाने तक बीजेपी 70 में से 57 सीटों पर जीत और बढ़त बनाए हुए है। हालांकि इस भारी भरकम जीत के बावजूद बीजेपी के लिए झटके वाली बात यह रही कि प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट चुनाव हार गए। गढ़वाल के सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की जीत को अप्रत्याशित बताया और कहा कि यह मोदी की कार्यशैली की जीत है। दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके खंडूरी ने कहा, 'यह मोदी की कार्यशैली की जीत है, देश की भलाई के लिए उनके द्वारा किये जा रहे कामों पर जनता का विश्वास है, यह मोदी लहर है, यह अप्रत्याशित जीत है।'

पंजाब में पंजा, आप के अरमानों पर चला झाड़ू

यूपी और उत्तराखंड में चारों खाने चित कांग्रेस को पंजाब ने ढांढस दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पार्टी शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन को सत्ता से बेदखल करने में कामयाब रही। कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 69 पर जीत के साथ 78 सीटों पर आगे है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन केवल 17 सीटें (अकाली दल-14, बीजेपी-तीन) जीत सकी है। यहां पहली बार चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी (आप) मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है, जिसने 20 सीटें जीती हैं। आम आदमी पार्टी को इस सीमावर्ती राज्य में सरकार बनाने लायक बहुमत की उम्मीद थी, लेकिन इस लिहाज से परिणाम उसके लिए निराशाजनक रहा है। हालांकि राज्य में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरने को पार्टी ने एक उपलब्धि बताया। आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने कहा, 'हमें पंजाब में सरकार बनाने की उम्मीद थी। लेकिन हम नतीजों से निराश हैं। हालांकि राज्य विधानसभा चुनाव में एक नई पार्टी का दूसरे स्थान पर रहना भी बड़ी बात है। इसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि आप नेताओं को आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर इस सीमावर्ती राज्य में सरकार बनाने की पार्टी की कोशिशों में कहां कमी रह गई?

गोवा-मणिपुर त्रिशंकु विधानसभा की ओर

गोवा-मणिपुर में त्रिशंकु विधानसभा की ओर बढ़ता हुआ दिख रहा है। गोवा में 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी, दोनों बहुमत के आंकड़े से दूर हैं। इसके कारण सरकार गठन में छोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। 40 सीटों के रुझानों और नतीजों में कांग्रेस 19 और बीजेपी 14 पर आगे है। क्षेत्रीय पार्टियों गोवा फॉरवर्ड और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी ने तीन तीन सीटें जीती हैं। राकांपा एक सीट है, दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार एक सीट पर आगे है और एक अन्य पर फिर से मतगणना हो रही है। बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में 21 सीटें जीती थीं, जब वह 2012 में सत्ता में आई थी। बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर मांद्रे सीट से चुनाव हार गए। उनके कैबिनेट सहयोगियों दयानंद मांद्रेकर (शियोली) और दिलीप परुलेकर (सालगाव) भी चुनाव हार गए। प्रमुख कांग्रेस विजेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत भी शामिल हैं। तटवर्ती राज्य गोवा के चुनावी मुकाबले में पहली बार उतरने वाली आप कोई सीट नहीं जीत पाई। आरएसएस के बागी सुभाष वेलिंगर का गोवा सुरक्षा मंच, शिवसेना को भी कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन उनकी गठबंधन सहयोगी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी को तीन सीटें मिलीं। महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी चार फरवरी के चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से अलग हो गई थी और तीन पार्टियों के साथ गठबंधन बना लिया था।पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में कांग्रेस व बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर नजर आ रही है। कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस दो-चार सीटों के मामूली अंतर से एक-दूसरे से आगे-पीछे हो रही हैं। फिलहाल, कांग्रेस आगे नजर आ रही है। पार्टी 19 सीटें जीतकर चार पर आगे है, जबकि बीजेपी 18 सीटें जीतने के साथ पांच सीटों पर आगे है।

बढ़ेगा मोदी और अमित शाह का कद

इस जीत से गदगद अमित शाह शनिवार शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। मुमकिन है कि वह पार्टी की आगे की रणनीति का इसमें खुलासा करें। बीजेपी के नेताओं के मुताबिक, यह तय है कि इस बार के चुनावी नतीजे पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कद पर भी असर डालेंगे। पहले से ही पूरी तरह से पार्टी और सरकार पर मजबूत पकड़ बना चुकी मोदी-शाह की जोड़ी के लिए यह जीत मनोबल और ज्यादा बढ़ाने वाली साबित होगी। यही नहीं, पार्टी के भीतर जो नाराज नेता मौके के इंतजार में हैं, उनके रास्ते बंद हो जाएंगे।

पार्टी के एक नेता के मुताबिक, इन चुनावों में भी प्रचार का केंद्र बिंदु खुद पीएम मोदी ही रहे हैं। जाहिर है कि उसका क्रेडिट उन्हें ही मिलेगा। इसी तरह से शाह को भी पार्टी के अब तक के सबसे सफल अध्यक्ष का खिताब मिल जाएगा। अब तक उनके नेतृत्व में पार्टी ऐसे राज्यों में जीत हासिल कर चुकी है, जहां इससे पहले शायद वह कभी मुख्य विपक्षी दल भी नहीं रही।

आगे की राह भी होगी आसान

ये चुनावी नतीजे अभी से गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव की तस्वीर भी कुछ-कुछ साफ कर देंगे। दरअसल, इस साल के अंत में ही इन दोनों राज्यों में चुनाव होने हैं। गुजरात चुनाव खुद मोदी और शाह के लिए निजी परीक्षा से कम नहीं है। यही वजह है कि इस जीत से उसका उत्साह इस कदर बढ़ जाएगा कि उसके लिए गुजरात और हिमाचल प्रदेश बड़ी चुनौती साबित नहीं होगा। मोदी गुजरात चुनाव को किस गंभीरता से ले रहे हैं, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अभी से गुजरात में विकास परियोजनाओं के उद्‌घाटनों की शुरुआत कर दी है। जीत के बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में भी बीजेपी को कोई अड़चन नहीं आएगी।